बहुत दिनों से इसी तरह के विचार मन में चल रहे हैं। कौन जानता है कितना समय है मेरे पास? क्या अगर कल भगवान आते हैं और कहते हैं, "चलो!", तो क्या मैं ख़ुशी-ख़ुशी जा सकूँगा? या मन में कुछ पश्चाताप, कुछ असंतोष रहेगा? क्या मैंने वो सब कर लिया है- जो मैं करना चाहता था? क्या मुझे पता भी है कि आखिर मैं करना क्या चाहता था?
कई बार आप जिस तरह के विचार रखते हैं, उसी तरह की चीजें आप की तरफ attract होती हैं। शायद इसी वजह से एक बुक की तरफ attract हुआ "The Top Five Regrets of the Dying". कुछ और ऐसे ही videos YouTube पर भी दिखे।
कुल मिलाकर सच यही है कि अंत निश्चित है। घड़ी लगातार चल रही है। समय सबके पास सीमित है।
समय कितना है नहीं पता। पर जितना भी है क्या उसका सदुपयोग हो सकता है? क्या बचे समय में वो सब किया जा सकता है जो वाकई में करना चाहिये? पर कैसे पता चले कि मुझे क्या करना चाहिये ?
निश्चित ही 10-5 जॉब तो नहीं करना। Tax, Bills, Loans, EMIs, Premiums ही नहीं pay करते रहना है। अगर 15 साल काम करना है तो 2000 घंटे हर साल के हिसाब से 30000 घंटे काम करना है, जो कुल मिला कर जीवन के 3.5 साल होते हैं। क्या इस समय को वो काम करते हुए बिताना है, जिसको करने से शायद जीवन के असली उद्देश्य को achieve करने में कोई फायदा नहीं।
फिर? फिर आखिर मुझे करना क्या है?