Friday, 25 August 2017

मैं और अमिताभ बच्चन ... (माया क्या है?)

मैं और अमिताभ बच्चन

(माया क्या है?)

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी बुधवार विक्रम संवत् 2074                           25 अगस्त 2017

माया की एक बहुत ही सरल परिभाषा कहीं पढ़ी थी | “दृष्टा और दृश्य में भेद बताने वाली शक्ति को ही माया कहते हैं |” दृष्टा अर्थात जो देख रहा है | दृश्य अर्थात जो दिख रहा है | जिस शक्ति की वजह से ‘जो देख रहा है’ वह अपने आप को ‘जो दिख रहा है’ उससे अलग मानता है वही माया है | मैं जब अपने आप को हाथ, पैर, सिर और धड़ वाला ये शरीर मानने लगता हूँ और इस शरीर के बाहर जो कुछ भी है उसे मुझसे अलग मानने लगता हूँ, उसे ही माया कहते हैं |
कहते हैं – जो पहले था और जो बाद में होगा वही आज भी है | जिस शक्ति की वजह से आज वह  अलग दिखाई देता है वही माया है | जैसे जब हम किसी खेत जाते हैं जहाँ छोटे छोटे पौघे लहलहा रहे हों | अगर हम किसान से पूछें ये किस चीज का खेत है? तो किसान कहता है गेहूं का खेत है | लेकिन अभी गेहूं तो कहीं दिखाई नहीं दे रहे, फिर यह गेहूं का खेत कैसे हुआ? जो बोया गया था वह गेहूं था और फसल पकने के बाद जो प्राप्त होगा वह गेहूं होगा किन्तु आज तो कहीं गेहूं नहीं है, फिर यह गेहूं का खेत कैसे हुआ | चूँकि जो पहले था और जो बाद में होगा वही आज भी है, इसी वजह से आज भी हम कहते हैं कि यह गेहूं का खेत है |
इसी तरह जैसे कुम्हार मिट्टी से घड़े, सुराही, और गमले बनाता है | बनने से पहले भी ये सब मिट्टी  थे और टूटने के बाद भी ये सब मिट्टी हो जायेंगे | अतः वास्तविकता में आज भी ये सब मिट्टी ही हैं | जिस शक्ति की वजह से ये सब आज हमें घड़े, सुराही और गमले अलग अलग दिखाई देते हैं, वही शक्ति माया है |
अगर हम भौतिक विज्ञान की दृष्टि से देखें तो लगभग 1380 करोड़ वर्ष पहले सारा संसार केवल आग का एक गोला था | ये पृथ्वी, चाँद, सितारे, सौर मंडल, आकाश गंगाएं कुछ भी नहीं थे | मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़ पौघे होने का तो सवाल ही नहीं उठता | अगर कुछ था तो बस आग का एक गोला | फिर किसी नियत समय पर इसने फैलना और ठंडा होना प्रारंभ किया, जो आज भी सतत जारी है | इसी प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में बिग बैंग (Big Bang) कहते हैं | इसी आग के गोले से ही समस्त आकाशगंगाओं, सौरमंडल, पृथ्वी और अंतत: मनुष्य, जीव-जंतुओं एवं पेड़ पौधों की उत्पत्ति हुई | इसी के ठीक उलट Big Crunch थ्योरी कहती है की किसी एक नियत समय पर यह फैलना और ठंडा होना रुकेगा और धीरे धीरे समस्त संसार पुनः आग के उस गोले में परिवर्तित हो जायेगा |
अत: अगर हम विज्ञान की मानें तो हम सब मनुष्य - मैं, आप सब और यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन भी कभी एक ही थे – आग का एक विशाल गोला | और आने वाले कई वर्षो बाद भी हम सब एक ही हो जायेंगे - फिर वही आग का एक विशाल गोला | अतः जो पहले था और जो बाद में होगा वही आज भी है | जैसे हम सब पहले एक थे आगे भी हम सब एक ही होंगे उसी तरह आज भी हम सब एक ही हैं | जिस शक्ति की वजह से आज हम सब अलग अलग दिखाई देते हैं वही माया है |
इसी तरह अगर अध्यात्म की दृष्टि से देखें तो जब संसार में कुछ भी नहीं था तब सिर्फ परमपिता परमेश्वर थे | उसी परमात्मा से सभी आत्माओं की उत्पत्ति हुई है | और अपना अपना किरदार निभाने के बाद हम सब पुन: उसी परमात्मा में समाहित हो जायेंगे | अत: मैं, आप सब यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन भी अध्यात्म की दृष्टि से कभी एक ही थे | और आगे भी हम सब उसी एक ही हो जायेंगे | अत: जो पहले था और जो बाद में होगा वही आज भी है | अर्थात हम सब अध्यात्म की दृष्टि से भी जैसे हम सब पहले एक थे आगे भी एक ही होंगे, उसी तरह आज भी हम सब एक ही हैं |

क्या हिन्दू क्या मुस्लिम, क्या ब्राम्हण क्या शूद्र, क्या गोरा किया काला, क्या पुरुष क्या स्त्री, क्या जड़ क्या चेतन – हम सब एक ही हैं | माया का यह साधारण सा सिद्धांत अगर हम सब समझ जायें, तो संसार की बहुत सारी समस्यायें बहुत सारे झगड़े आसानी से सुलझ सकते हैं |

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