॥ जय श्री गणेश ॥ जय सरस्वती माँ ॥ जय श्री राम ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
मैं कुछ लिखना चाहता
हूँ | अपने जो भी विचार हैं उन्हें शब्दों में उतारना चाहता हूँ | एक ही काम तो है
जो बचपन से बहुत अच्छे से करता आया हूँ और आज भी उतने ही अच्छे से करता हूँ –
सोचने का| घंटों अपने सोच विचारों में खोया रहा करता था और आज भी समय मिलते ही
अपनी सोच में डूब जाना पसंद करता हूँ | कहते
हैं एक सामान्य मनुष्य के मस्तिष्क में एक दिन
में लगभग 60 हजार विचार आते हैं | आज जन्म के लगभग 15 हजार दिन बीत चुके हैं और इस
बीच लगभग 90 करोड़ से भी ज्यादा विचार मेरे मस्तिष्क से गुजर चुके हैं | कभी इन में
से किसी भी विचार को नोट नहीं किया | आज याद करने बैठता हूँ तो याद ही नहीं आता कि
इन 90 करोड़ विचारों में क्या क्या सोचता रहा | इसलिए चाहता हूँ कि इन
विचारों में से कुछ ख़ास को याद करूँ और नोट करू |
मुझे ज्यादा बोलना
कभी पसंद नहीं रहा इसलिए मेरे आसपास भी बहुत कम ऐसे लोग रहे हैं जो ये जानते होंगे
कि मेरे दिमाग में क्या चलता रहा है | लेकिन किसी और को बताने के बजाय खुद ये हिसाब
किताब रखना चाहता हूँ कि मैंने इतने सालों में क्या किया या क्या सोचा |
कुछ धुंधली सी याद
है कि मैंने शायद पांचवी या छठी कक्षा से बहुत ज्यादा सोचना शुरू किया | बहुत बड़े
बड़े विचार हुआ करते थे, बड़े बड़े सपने, बड़ी बड़ी महत्वाकांक्षाएं | सारी दुनिया को
बदल देना चाहता था और उसके लिए बहुत सारे उपाय भी हुआ करते थे | सबके लिए ऐसा
आदर्श बनना चाहता था, ऐसा जीवन जीना चाहता था जिसका लोग अनुसरण कर सकें | ये सब 90
करोड़ विचार बस विचार ही रहे | कभी कुछ किया नहीं | अब सोचता हूँ कम से कम इन्हें
लिख तो लूँ | क्या पता कहीं काम आ जायें |
इन 15 हज़ार दिनों
में बहुत से सवाल रहे मन में | मैं कौन हूँ, कहाँ हूँ, मैं जहाँ हूँ वहाँ क्यों
हूँ? मेरे साथ में जो भी हैं वो कौन हैं, वो मेरे साथ क्यों हैं? जो आज साथ नहीं
हैं उन्हें क्यों मेरे जीवन में लाया गया था? संसार में इतने संघर्ष क्यों हैं, दुःख
क्यों हैं, दर्द, बीमारी, अज्ञान, गरीबी, भटकाव क्यों है? क्या इनसे निकलने का कोई
उपाय है और अगर है तो क्या है? संसार क्यों चल रहा है? क्या इसे कोई चलाने वाला है
या ये अपने आप ही चल रहा है? इन सबके जवाब ढूँढने के लिए कई किताबें पढ़ीं, अपने
बड़ों से चर्चा की, धर्मगुरुओं और महापुरुषों को सुना, पढ़ा | कई सवालों के जवाब
मिले कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं | ज्ञान प्राप्ति तो एक यात्रा है जो जीवन
पर्यंत जारी रहेगी, रहनी भी चाहिए| परन्तु अब महसूस होता है कि आगे और जानने से
पहले जरुरी है कि जो समझ चुका हूँ उसे संकलित करूँ और व्यवस्थित करूँ |
अपने ईश्वर, देवी देवताओं, सभी पूर्वजों, माता-पिता और बड़ों को प्रणाम करके
अपनी यात्रा प्रारंभ करना चाहता हूँ |
॥ ॐ ॥
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