Monday, 29 December 2025

तू भी तो मैं ही हूँ...


सूर्य में हूँ, चंद्रमा में हूँ,

सितारों में हूँ, नक्षत्रों में हूँ,

और जो अनंत ब्रह्मांड में है, वो भी मैं ही हूँ...

 

अणु में हूँ, परमाणु में हूँ,

जीवाणु में हूँ, कीटाणु में हूँ,

और जो कण कण में है, वो भी मैं ही हूँ...

 

स्पंदन में हूँ, कंपन में हूँ,

हलचल में हूँ, कल-कल में हूँ,

और जो नि:स्पंद है, वो भी मैं ही हूँ...

 

गीता में हूँ, कुरान में हूँ,

बाइबिल में हूँ, गुरुबान में हूँ,

और इससे परे जो मौन है, वो भी मैं ही हूँ...

 

होने में हूँ, ना होने में हूँ,

आदि में हूँ, अंत में हूँ,

और जो अनंत है, वो भी मैं ही हूँ...

 

साधन भी हूँ, साधना भी हूँ,

साधक भी हूँ, साध्य भी हूँ,

और जो असाध्य है, वो भी मैं ही हूँ...

 

दृश्य भी हूँ, अदृश्य भी हूँ,

द्रष्ट भी हूँ, द्रष्टा भी हूँ,

और जो अदृष्टा है, वो भी मैं ही हूँ...

 

प्रमा भी हूँ, प्रमाता भी हूँ,

प्रमाण भी हूँ, प्रमेय भी हूँ,

और जो अप्रमेय है, वो भी मैं ही हूँ...

 

यहाँ भी हूँ, वहाँ भी हूँ,

और सारे जहाँ में हूँ,

और जहाँ नहीं हूँ, वहाँ भी मैं ही हूँ...

 

इसमें हूँ, उसमें हूँ,

और ना जाने किस किस में हूँ,

मैं तो मैं हूँ ही, तू भी तो मैं ही हूँ...

यही तो वक्त है...

 

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का,

उठने का, चलने का, घर से निकलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...

 

कुछ पुराने घाव हैं, कुछ अधुरे ख़्वाब हैं,

घावों के भरने का, ख्वाबों के मचलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...

 

घोर घना अँधेरा है, मुसीबतों का घेरा है,

आशा की, उम्मीदों की, मशालों के जलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...

 

थकना चाहते हो, रुकना चाहते हो, हारना चाहते हो,

पूरी शक्ति समेट कर, एक एक इंच चलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...

 

क्या होगा, कब होगा, कैसे होगा,

जो होगा अच्छा होगा, सवालों से निकलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...

 

कुछ वक्त लग सकता है, पर बदलेगा ज़रूर,

बस थोड़ा-थोड़ा-थोड़ा करके, थोड़ा और सम्भलने का,

यही तो वक्त है, वक्त के बदलने का...


दृष्टि के बदलने का, सृष्टि के बदलने का,

व्यष्टि के बदलने का, समष्टि के बदलने का,

यही तो वक्त हैवक्त के बदलने का...


खुदा करें ख़ुद को...

खोजते हैं ख़ुद को, अवतारों को खोजते हैं,
चलो होने ना होने के, विचारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं रास्ते, इशारों को खोजते हैं,

ख़ुद से ही ख़ुद के, नज़ारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं चाँद को, सितारों को खोजते हैं,

असीमित अनंत के, भंडारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं दर को, दयारों को खोजते हैं,

जो तोड़नी है ऐसी, दीवारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं सागर को, विस्तारों को खोजते हैं,

दरिया में डूबकर, किनारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं बाग को, बयारों को खोजते हैं,

जो खोजती हैं मुझको, बहारों को खोजते हैं.

 

खोजते हैं अर्श को, आकारों को खोजते हैं,

जो खुदा करे ख़ुद को, संस्कारों को खोजते हैं.


मैं और मेरी लकीरें...

कल तो बड़ी ही अजीब रात हुई,

लकीरों से बहुत देर मेरी बात हुई।

यकीन नहीं हुआ, लकीरें भी कहीं बोलती हैं,

लकीरों ने ही बताया, वो तो सारे राज़ खोलती हैं।

 

याद करो जब बचपन में, हाथ उन्हे दिखलाया था,

हमें देखकर ज्ञानी जी ने, क्या तुम्हें बतलाया था।

मुझे देख कर तुम्हें कहा था, धन के योग बहुत ही कम हैं,

उसे देख कर वो बोले थे, आयु भी मद्धम मद्धम है।

तिरछी वाली कुछ छोटी है, नाम नहीं तुम कर पाओगे,

सीधी वाली कुछ मोटी है, आस नहीं कि घर पाओगे।

छोटी वाली कुछ तिरछी है, पत्नी-सुख में कुछ संशय है,

लंबी वाली ये कहती है, भाग्योदय में कुछ भय है।

तुमने जब ये जान लिया था, सब कुछ सच है मान लिया था।

 

और भला मैं क्या करता, जब भाग्य नहीं क्या लड़ता?

 

इतना तो कर ही सकते थे,

हाथ अपना खुद पढ़ सकते थे।

हम चीख-चीख चिल्लाती थीं,

एक गूढ़ राज़ बतलाती थीं।

 

ऐसा क्या जो कोई ना जाना,

ऐसा क्या जो मैं ना पहचाना।

 

वो कोने में छोटी सी, एक लकीर देख सकते हो,

वो क्या कहती है सुनो, अगर तुम सुन सकते हो।

वो कहती है तुम अपनी, हर चीज बदल सकते हो,

हाथ बाँध कर हाथों की, लकीर बदल सकते हो,

हाथ खोल कर तुम सारी, तस्वीर बदल सकते हो,

हाथ उठा कर जीवन की, तकदीर बदल सकते हो,

हाथ जोड़ कर सपनों की, जागीर बदल सकते हो।

 

भाग्योदय कैसे होगा, जब कर्मों से भागोगे,

भाग्योदय तो तब होगा, जब सपनों से जागोगे।

 

कितने वषों का जीवन है, कहाँ पता कर सकते हो,

वषों में कितना जीवन है, ये खुद तय कर सकते हो।

 

करो परिश्रम, करो पराक्रम, घर अपना बन जायेगा,

नाम तुम्हारे पीछे चलकर, खुद अपने घर आएगा।

 

गये नहीं  विदेश तो क्या, तुम देश बदल सकते हो,

अपनी किस्मत के तुम सारे, आदेश बदल सकते हो।

 

आज मांगती सभी लकीरें, इतना तो कर ही सकते हो,

हाथ उठा कर करो प्रतिज्ञा, कोशिश तो कर ही सकते हो।

 

जो बीत गया सो बीत गया, अब अंजाम बदल सकता हूँ,

हाथ रखा अपने दिल पर, अब कोशिश तो कर ही सकता हूँ।